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Bhavina’s journey to silver medal: पैरालिंपिक्स में सिल्वर जीतने वाली कौन है भाविना पटेल जानिए पैरालिंपिक्स तक उनकी यात्रा

Bhavina’s journey to silver medal: पैरालिंपिक्स में सिल्वर जीतने वाली कौन है भाविना पटेल (Who is Bhavina Patel)  जानिए पैरालिंपिक्स तक उनकी यात्रा 
Bhavina’s journey to silver medal:  टोक्यो पैरालिंपिक्स (Tokyo Paralympics) में भारत के लिए टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। 34 साल की उम्र में भाविना अपना पहला पैरालंपिक खेल रहीं हैं और सिल्वर मेडल के साथ वापस अपने वतन वापसी करेंगी। 

पैरालिंपिक्स में भाविना ने हासिल की कई उपलब्धियां


34 वर्षीय ने महिला सिंगल्स क्लास 4 क्वार्टर फाइनल में दुनिया की 5वें नंबर की खिलाड़ी व रियो 2016 की गोल्ड मेडल विजेता सर्बिया की खिलाड़ी बोरिस्लावा पेरिच रांकोविच (Borislava Peric Rankovic) मात देकर पैरालंपिक में पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गईं।


क्लास 4 की पैडलर ने दुनिया की नंबर 3 चीन की झांग मियाओ (Zhang Miao) को हराकर पैरालंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गईं।


साथ ही भाविना पटेल भारत से पैरालिंपिक्स में टेबल टेनिस में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं हैं। 


जानते हैं कैसी रही भाविना पटेल की अब तक की यात्रा



एक हादसा जिसने बदल दी जिंदगी


भाविना के बचपन में उनके साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जिसने भाविना के आने वाले संपूर्ण भविष्य को बदल दिया। ये घटना तब की जब भाविना मात्र एक साल की थीं और अपने पैरों पर खड़े होकर चलना सीख रहीं थीं तब वो अजीब तरीके से जमीन पर गिर गईं जिससे उनकी कमर के निचले हिस्से में चोट आई और निचला हिस्से ने कार्य करना बन्द कर दिया। 


टेबल टेनिस को बनाया भविष्य


वो कहतें हैं न जिनके इरादे मजबूत हों उनका कोई रोड़ा नही बन सकता भाविना 12 साल की उम्र में वह कंप्यूटर सीखने के लिए अहमदाबाद के वस्त्रापुर में ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन चली गईं। यहीं पर भाविना मुलाकात टेबल टेनिस खेलने वाले दिव्यांग बच्चों से हुई और उन्होंने टेबल टेनिस को अपनाने का फैसला कर लिया।

भाविना ने टेबल टेनिस सीखना शुरू कर दिया और जल्द ही खेल को समझ लिया। उन्होंने खेल में भाग लेने के पहले ही साल में एक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। भाविना ने खेल के साथ साथ अपनी पढ़ाई पर भी कोई असर नहीं पढ़ने दिया और उन्होंने संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

प्रशिक्षण के लिए पिता ने बंद की अपनी दुकान


कहते हैं जिनके साथ माता पिता का सहयोग हो वो बच्चे अक्सर सफलता प्राप्त करते हैं। भाविना को भी अपने अभिवावकों से पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। मेहसाना के वडनगर तहसील के गांव में कटलरी की दुकान चलाने वाले उनके पिता हसमुख पटेल ने बड़े आयोजनों के लिए अपनी बेटी के प्रशिक्षण कराने के लिए उन्होने आपनी दुकान तक बंद करने का फ़ैसला किया। 

उनके पिता ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया, "मैंने दुकान बंद कर दी और अपनी पत्नी के साथ अहमदाबाद पहुंचा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह बड़े आयोजन के लिए ठीक से प्रशिक्षण ले। हम चाहते हैं कि वह प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करे।"


चुनौतियों ने हार नहीं मानती भाविना


उनके कोच दोशी का मानना है कि यह उनकी चुनौतियों के दौरान कभी हार न मानने वाली भावना है, जो उन्हें चैंपियन बनाती है। उन्होंने नियमित प्रशिक्षण के दौरान उनकी जीतने वाली मानसिकता को करीब से देखा था।

दोशी ने कहा, "भाविना ने हमेशा प्रतिस्पर्धा के हर चरण में उतार-चढ़ाव देखा है, लेकिन मैं उसके भीतर अदम्य फाइटर को जानता हूं। जब भी हमें कोई झटका लगा, तो हमने हर बुनियादी चीज पर काम किया। वह और मजबूत होकर वापस लौटी।"

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में हमने उसकी सजगता, मानसिक समन्वय, फिजियो, भोजन की आदत, आराम चक्र, बॉडी क्लाक और अन्य हर पहलू पर काम किया है। ताकि, वह इस तरह की दबाव वाली परिस्थितियों में प्रदर्शन कर सके। और इसका परिणाम आप आज देख सकते हैं।"




 

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