किसानों को MSP की लीगल गारंटी ना दे पाने वाली मोदी सरकार अपने उद्योगपति साथियों को अनाज के गोदाम चलाने के लिए निश्चित मूल्य दे रही है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 3, 2021
सरकारी मंडियां या तो बंद हो रही हैं या अनाज खरीदा नहीं जा रहा।
किसानों के प्रति बेपरवाही और सूट-बूट के साथियों के प्रति सहानुभूति क्यूँ?
देश एक बार फिर चंपारन जैसी त्रासदी झेलने जा रहा है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 3, 2021
तब अंग्रेज कम्पनी बहादुर था, अब मोदी-मित्र कम्पनी बहादुर हैं।
लेकिन आंदोलन का हर एक किसान-मज़दूर सत्याग्रही है जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा।
क़ुर्बानी, शहादत और बलिदान !
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) January 3, 2021
अब यही है अन्नदाता की कहानी।
अब शमशेर सिंह, लिधड़ा, ज़िला संगरूर ने अपनी जान दे दी।
हाड ठिठुराती सर्दी में न्याय माँगता किसान,
और...
पूँजीपतियों के आगे नतमस्तक एक हुकमरान !
जान ले लें मोदी जी पर किसान के इरादे अडिग हैं।#FarmersAppealTotalRepeal pic.twitter.com/WOlch5NvG4
