चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर के चामुंडि पर्वत पर स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह चामुण्डेश्वरी या दुर्गा का मन्दिर हैचामुंडी पहाड़ी समुद्र तल से करीब 1065 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। चामुंडी पहाड़ी की चोटी पर देवी पार्वती के एक अवतार चामुंडेश्वरी को समर्पित चामुंडेश्वरी मंदिर है। वास्तव में यह वुडेयार की देवी हुआ करती थी। इस मंदिर को 11 शताब्दी में बनवाया गया था और 1827 में मैसूर राजाओं ने इसकी मरम्मत करवाई।
ऐसी मान्यता है कि जब शिव जी सती के शव को कंधे पर लेकर तांडव नृत्य कर रहे थे और उनके क्रोध को शांत करने के लिए विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र चलाया था तो उससे कट कर सती के बाल इसी स्थल पर गिरे थे। इसी वजह से इस तीर्थस्थल को शक्तिपीठ की मान्यता दी गई है। पौराणिक काल में यह क्षेत्र क्रौंचपुरी कहलाता था, इसी कारण दक्षिण भारत में इस मंदिर को क्रौंचापीठम के नाम से भी जाना जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार इस शक्तिपीठ की रक्षा के लिए कालभैरव यहां सदैव विराजमान रहते हैं।
द्राविड़ वास्तुशिल्प से निर्मित यह मंदिर बहुत सुंदर एवं कलात्मक है। मंदिर के अंदर गर्भगृह में देवी की प्रतिमा सोने से बनी है। सात मंजिला इमारत के रूप में निर्मित इस मंदिर का भव्य स्वरूप भक्तों को मुग्ध कर देता है। मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा-सा शिवमंदिर है, जो 1,000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। पहाडिय़ों की चोटी से मैसूर की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। मैसूर के दशहरे का त्योहार विश्वप्रसिद्ध है। विदेशी पर्यटकों के लिए यह एक अनूठा और अद्भुत दृश्य होता है, जिसे वे अपने कैमरों में कैद कर लेते हैं। यहां से मां चामुंडेश्वरी की पालकी भी निकाली जाती है।



