एक ऐसी किताब जो भारत के सबसे महान क्रांतिकारी ने लिखी जिसे इतिहास में भुला दिया गया वामपंथी इतिहासकारों द्वारा अब उनकी किताब पढ़ने के लिए उसकी कीमत से ज्यादा उसकी डिलीवरी चार्ज देना पड़ रहा है मतलब साफ है कि ये कही देश के बाहर से आयेगा। अब सवाल ये है कि भारत के लेखक की लिखी हुए किताब विदेश से आए रही है तो ये गलती किसकी है।
इन महान लेखक का नाम है भाई परमानंद,
भाई परमानंद भारत के महान् क्रांतकारियों में से एक थे इनके विद्यालय से पढ़ाई कर के भगत सिंह और राजगुरु जैसे क्रांतिकरियों के मन में क्रांति की भावना आयी और वो क्रांति की राह पर निकल चले।
भाई जी शुद्ध हिन्दू विचारधारा को मानने वाले थे इन्हें भी महान क्रांतकारी #विनायक_दामोदर_सावरकर के साथ काले पानी की सज़ा हुई थी और लाहौर से इन्होंने भारत की क्रांति की नींव रखी थी। भारत का बंटवारा इनके लिए सबसे सुखद अनुभव था और आजादी के बाद, बंटवारे के बाद ये सहन नहीं कर सके कि उनके मुल्क के दो टुकड़े हो चुके है और ये सदमा ये बर्दास्त नहीं कर सके और #दिसंबर_1947 में ही चल बसे।
इन्हें भुलाने का सबसे बड़ा मकसद ये माना जा सकता है की हमे इतिहास में ये पढ़ाया जाता है कि अंग्रेज आए और भारत के दो टुकड़े कर के चले गए लेकिन भाई परमानंद ने सन् 1930 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि मुस्लिम नेता अपना अलग इस्लमिक मुल्क बनाना चाह रहे है और कांग्रेस इसमें पूरा साथ दे रही है। भाई जी कांग्रेस के बहुत बड़े आलोचक थे शायद उन्हें कांग्रेस की नीयत का पता था। ऐसा भी नहीं था कि वो कांग्रेस के सभी नेताओ के आलोचक थे, इन्होंने लाला लाजपत राय के साथ भी काम किया था और वे उनके कार्य को प्रशंसनीय मानते थे लेकिन गांधी के बहुत बड़े आलोचक थे।
भाई जी ने कई देशों का भ्रमण किया जो बहुत लंबे समय तक चला उसके बाद वे लाहौर ( तत्कालीन भारत) लौट आए और क्रांति में अपना अमूल्य सहयोग किया, और एक महत्पूर्ण भूमिका आजादी के दौरान निभाई।
इनकी रचनाएं पढ़ने का मन कर रहा था कई रचनाएं मिल तक नहीं रही है मिल भी रही है तो ऐसी स्तिथि में की देख कर शर्म आ रही है भाई जी की लेखनी फिर भी हमेशा याद की जाती रहेंगी और मेरे जैसे युवाओं के प्रेरणा स्रोत हमेशा रहेंगे और आपकी रचनाओं की पुनः जीवंत करने के लिए जान लगा देंगे। भारत में आपके कार्यों को भूलने की पूरी कोशिश की गई लेकिन पुनः आपके इतिहास को भारत का बाच्चा बच्चा जानेगा।
भाईजी की प्रमुख रचनाएं निम्न है:-
1- काले पानी की करवास कहानी: आपबीती
2- हिन्दू संगठन
3- भारत का इतिहास
4- दो लहरों की टक्कर
5- मेरे अंत समय का आश्रय
6- पंजाब का इतिहास
7- वीर बंदा वैरागी, इत्यादि
इनके इतिहास को पढ़ के लगता है कि शायद किसी साजिश के तहत ही भारत को गांधी और नेहरू का देश बनाया गया वरना भारत क्रांतिकारियों का देश रहा है और एक बात हमें हमेशा याद रखनी चाइए की ए. ओ. ह्यूम ने कहा था कि कांग्रेस की स्थापना का उद्देश्य 1857 की क्रांति दोबारा ना हो इसलिए इसकी स्थापना की गई। और आज इनके और गुरुदत्त जैसे लेखकों को पूरी तरह से भूलने की कोशिश की गए लेकिन प्रकृति का नियम होता है वो जहा भी उम्मीद देखती है उसके पास वो अपना प्यार बरसा देती है शायद ये लेख उनकी यादों को पुनर्जीवित करने का एक माध्यम हो। क्या पता क्या हो लेकिन किसी महान शक्स ने एक बात बहुत अच्छी कहीं है
करत करत अभ्यास ते, जड़मती होत सुजान
रसरी आवत जात ते, सिल पे पड़त निशान।
अभी तो रसरी घिसने मैंने शुरू कर दी है क्या पता कभी सिल पर निशान ही पड़ जाए।
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| Ankesh Singh Journalism Student Buxar, Bihar |


