Type Here to Get Search Results !

हाँ मैं किसान! हूँ ..... पढ़िए किसानों पर रेनू सिंह सेंगर की लिखी मार्मिक कविता

हाँ मैं किसान! हूँ.....
दिन भर की कड़ी धूप में तपता,
जाड़ा, बरसात हर मौसम सहता।
पर ...उफ्फ तक नही करता।।
 क्योकि मैं किसान हूं....

मैं अन्न उगाता हूँ,
मैं भी गर्वित होता हूँ।
क्योकि मैं पेट की भूख मिटाता हूँ।
पर.... मैं भूखा सो जाता हूँ।
क्योकि मैं किसान हूँ...
हाँ मैं किसान हूँ..

कभी मुझे कोई अन्नदाता कह दे,
फूला नही समाता हूँ...
पर.. ये राजनीति के जुमले,
हाय! नही समझ पाता हूं।
क्योकि मैं किसान हूं....
हाँ मैं किसान हुँ....

मत मारो मुझे लाठियों से,
मत रोको मेरा रास्ता ....
क्योकि मैं उगाना जानता हूँ तो,
मिटाना भी जानता हूं।।
क्योकि मैं किसान हूँ
हाँ मैं किसान हूँ.....

मेरे अन्न की कीमत तुम क्या लगाओगे?
कभी खेत की मिट्टी को माथे पर लगाया है??
मैंने तो उस मिट्टी के लिये जान तक गवाई है।
क्योकि मैं किसान हूँ.......
हाँ मैं किसान हुँ..........

मैं किसान हूँ, ऋणि हूँ, कर्जदार हूँ।
पर आज भी कृषि के लिये वफादार हूँ।।
हाँ मैं कृषि प्रधान हूँ, मैं सच्चा किसान हूँ।।
हाँ मैं किसान हूँ.....
हाँ मैं किसान हूँ.......
रेनू सिंह सेंगर
उरई (जालौन)


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad