ओवेसी ने कहा है कि वो महागठबंधन और एनडीए के सामने अपना महागठबंधन खड़ा करने के प्रयास में है। छोटे छोटे दलों को जोड़ कर बिहार में एक नए विकल्प को दिया जाए यह उनकी मंशा है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इस गठबंधन का फायदा बिहार के सत्ताधारी दल को फायदा पहुँचना का है तो इस पर ओवैसी ने जवाब दिया कि वो बिहार में अपना वजूद बढ़ाना चाहते है, किसी को समर्थन देना उनके एजेंडे में शामिल नही है। ओवेसी ने आगे कहा की अगर वह बिहार में अकेले चुनाव लड़ते तो लोग यह कहते कि वीते काटने के लिए उन्होंने उम्मीदवार उतारे लेकिन अब वह गठबंधन के स्वरूप को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी की माने तो ओवैसी की नज़र हाल में ही तेज़स्वी यादव का साथ छोड़ कर अलग हुए उपेन्द्र कुशवाहा पर है। इस सब के अलावा पप्पू यादव के अलायंस पर भी ओवैसी की नज़र है। सम्भवनाओ को हर जगह जगह और लगातार तलाशा जा रहा है की ओवैसी अपनी पकड़ बिहार में कैसे बढ़ाये। पार्टी की नज़र बिहार के कुल 39 सीट पर है जहाँ मुसलमान वोटरों की संख्या ज्यादा है। सीमांचल के अधिकतर सीट पर ओवैसी अपना खुद का उम्मीदवार उतारना चाहते हैं लेकिन वो चाहते है कि गठबंधन के सहारे बिहार में अपनी पहुँच और ऊंची करे।
