जिहाद के नाम पर मौत का खेल कब तक
एक बेटी को उसके मां बाप बड़े अरमानों के साथ उसका लालन-पालन करते हैं उसे अच्छी शिक्षा देते हैं पर फिर भी माता पिता अपनी बेटी को अकेले घर से बाहर नहीं निकलने देते है। ऐसा क्यों? क्यों आज बेटियां सुरक्षित नहीं है? क्यों आए दिन बेटियों के साथ दुष्कर्म होते हैं? आज निकिता कल कोई ओर दुष्कर्म का शिकार कब तक होती रहेंगी। क्यों नहीं हम ऐसे लोगों को फांसी पर चढ़ा सकते है आखिर कब तक लव जिहाद को बढ़ावा मिलता रहेगा। कभी फिल्म के नाम पर तो कभी किसी विज्ञापन के नाम पर। एक हिंदू लड़का अगर किसी मुस्लिम लड़की के साथ प्यार करता है तो उससे बड़ी बेहरमी के साथ मार दिया जाता है । फिर हमें 'गंगा जमुना की तहजीब' सिखाई जाती है ना तो गंगा उनकी है ना तो उनकी जमुना तो किस बात की तहजीब सोचने वाली बात है कि ऐसा एक या दो बार नहीं कई बार होता है फिर भी कोई कड़ा कानून क्यों नहीं बनता आखिर कब तक हिंदू लड़कियां लव जिहाद का शिकार बनती रहेंगी। कब तक हमारे देश के नेता जातियों के नाम पर राजनीति करते रहेंगे। कभी हाथरस में तो कभी कहीं और क्यों नहीं न्याय दिलाने के लिए एकजुट होते हैं उन्हें तो बस अपनी राजनीति की पड़ी है। बात अगर हिंदू की हो तो उसमें जाति ढूंढते हैं और फिर अपनी - अपनी राजनीति करने लगते हैं पर जब आरोपी खास समुदाय से हो तो चुप्पी साध लेते हैं यही चुप्पी एक दिन लव जिहाद में परिवर्तित हो जाती है जिसके चलते हैं लड़कियां लव जिहाद का शिकार होती रहती हैं आए दिन ऐसी घटनाओं के बारे में सुनते हैं पहले तो लड़की को प्यार के जाल में फंसा लेते हैं फिर शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन कराते हैं। कर लिया तो ठीक नहीं तो शादी के बाद जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करा देते हैं। उसके बाद क्या होता है हम और आप अच्छी तरह से जानते हैं जब कोई लड़की लव जिहाद का विरोध करती है तो उसे सरेआम बेखौफ होकर गोली से मार दिया जाता है या तो उसे गायब कर दिया जाता है। सोमवार को निकिता तोमर को सरेआम एक तौसीफ नाम के लड़के ने गोली से मार दिया तौसीफ ने पहले निकिता का धर्म परिवर्तन कराना चाहा था लेकिन सफल नहीं हो सका। जिसके बाद अपरहण करने का प्रयास किया पर सफल नहीं हुआ तो उसे गोली से मार कर हत्या कर दी। जिसका कारण बस एक ही था कि उसने ना तो अपना धर्म परिवर्तन करा ना उससे शादी की, जिसके कारण उस मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी। आखिर कब तक इतिहास में हुई गलतियों को दोहराते रहेंगे। आखिर कब तक हम उन्ही गलतियों से सीखने के बजाएं बार-बार करते रहेंगे ?
