अक्षत तिरवार की रिपोर्ट
उज्जैन। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्व विद्यालय की गतिविधियों को डिजिटल मोड में लाना का विरोध शुरू कर दिया है क्योंकि इसमें कई खामियां हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और ज्ञापन देकर मांग की है कि जिस तरीके से आईयूएमएस को लागू किया जा रहा है वह उचित नहीं है।
अभाविप का यह मानना है कि विश्वविद्यालय की गतिविधियों को डिजिटल मोड में लाना और ऑटोमेशन किया जाना एक स्वागतयोग्य कदम है,लेकिन जिस तरीके से आईयूएम एस क्रियान्वित किया जा रहा है , विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित सभी गतिविधियों को नियंत्रण करने के उद्देश्य से सभी तरह की सूचनाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर केंद्रित किया जा रहा है,इसे लेकर सवाल खड़े हो गए है,इस प्रणाली के कारण कई विसंगतियां पैदा होंगी और विश्वविद्यलय की व्यवस्था प्रभावित होगी।सर्वाधिक महत्पूर्ण यह है की यह प्रणाली शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरित हैं,।इससे संबंधित कुछ बिंदुओं पर अभाविप आपका ध्यान आकर्षित करना चाहती है।
सभी विश्वविद्यलयों की व्यवस्था को केंद्रित करना ,सूचनाओं को एक ही जगह एकत्रित करना व्यावहारिक और अनावश्यक कदम है, इससे डाटा हैकिंग से संबंधित कई बड़े खतरे है ।
. सभी विश्ववद्यालयों का नियंत्रण किसी एक विश्वविद्यालय के पास रहेगा तो एकाधिकार की समस्या रहेगी।
आईयूएम एस बिना किसी मंथन और विमर्श के लागू किया जा रहा है , जो छात्र हित में उचित नहीं है । कोई भी व्यवस्था केंद्रीकृत नहीं होनी चाहिए।
..एक तरफ पूरे देश में व्यवस्थाओं को विकेंद्रित करने और अधिक स्वायत्ता करने को लेकर कदम उठाए जा रहे है।
कई विश्ववद्यालयों के पास आज भी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को लेकर पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है , ऐसे में यह व्यवस्था किस तरीके से संचालित होगी। सभी विश्वविद्यलयों के डेटा के सुरक्षित होने की गारंटी क्या होगी ??
