भारत सरकार ने अपने कृषि सचिव संजय अग्रवाल के नेतृत्व में 1 टीम से बातचीत का प्रस्ताव रखा है, जिसमे कुल 10 अक्टूबर को विरोध कर रहे किसान नेताओं के निमंत्रण हस्ताक्षर किया गया था। इससे पहले किसान संगठनों ने पिछले हफ्ते केंद्रीय कृषि विभाग द्वारा 8 अक्टूबर को आयोजित बैठक में भाग लेने से किसान नेताओ ने अस्वीकार कर दिया था, जिसमे उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत होनी थी।
किसान संगठनों ने कहा था कि उन्होंने बैठक में भाग नही लिया क्योंकि सरकार ने कहा था किसानों ने कृषि कानूनों को गलत समझ लिया है। ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) के समन्वयक आविक सह ने बयान दिया कि हम सभी किसान कानून और उसके पीछे की मंशा को समझते है, यही कारण है कि8 हमने बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।
AIKSCC ने अपनी तरफ स्पष्ट कर दिया है की जब तक किसानों की प्रमुख मांगे पूरी नही हो जाती, बैठक में कतई भाग नही लिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हम अपनी मांगों का पत्र तैयार कर रहे है, जिसे जल्दी ही जारी कर दिया जाएगा।
इधर आविक साहा ने स्पष्ट किया कि नए कृषि क़ानूनो के योग्यता पर कोई बातचीत नही हो सकती। किसानों द्वारा पूर्व- स्थितियां निर्धारित की जाएंगी। इनमे कानून को भंग करने, एमएसपी (minimum selling prize) के लिए कानूनी समर्थन और वार्ता मंत्रिमंडल द्वारा अधिकृत समिति का साथ होना भी शामिल है।
वही भारतीय किसान यूनियन के महासचिव जगमोहन सिंह ने बयान दिया कि, 'हमे 14 अक्टूबर को एक बैठक का निमंत्रण मिला है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'जालंधर में 13 अक्टूबर को होने वाली बैठक में सभी किसान संगठन तय करेंगे की वार्ता के लिए दिल्ली जाने है कि नही।' पंजाब के किसानों की प्रमुखता से मांग है कि सभी तीनो कृषि कानून जो इसी वर्ष हाल में पारित हुए है उन सभी तीनो कानूनों को निरस्त कर दिया जाए।
