अंग्रेजी में एक कहावत है कि “A recession is when your neighbor loses his job; a depression is when you lose yours.”
असल जिंदगी में Recession की स्थिति तब कही जाती है जब अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट देखी जा रही हो। हमारे देश में इसको परिभाषित तो नहीं किया गया है। पर यूरोपियन देशों में कहा गया है कि जब ये गिरावट लगातार दो तिमाही से ज्यादा देखा जाए तो ऐसी स्थिति को Recession मान लेना चाहिए। इस समय अर्थव्यवस्था में वृद्धि (Growth) नेगेटिव हो जाती है।
इकॉनमी में नेगेटिव वृद्धि के अलावा हमे बाकी संकेत भी ऐसे ही मिलेंगे जो साफ इशारा करेंगे की इकॉनमी में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जैसे बढ़ती बेरोजगारी, उत्पादन में कमी इत्यादि।अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उसे डिप्रेशन कहते है।
दोनों में एक अंतर ये भी है कि रिसेशन से जल्द बाहर निकला जा सकता है अगर आप सही ढंग से इससे निपटे। पर डिप्रेशन से उबरने में सालो लगते है।
अपने 1930 की मंदी के बारे में सुना होगा। उसे डिप्रेशन कहा जाता है। इससे बाहर आने में लगभग 10 साल लगे थे। 2008 में जिस मंदी को देखा गया उसे रिसेशन कहा जाता है और उससे दुनिया को जल्द निजात मिल गया।एक और ध्यान देने योग्य बात है कि दोनों ही स्थितियों में महंगाई कम रहती है। Recession का मुख्य कारण ही है इकॉनमी में मांग का घटना। जबकि महगांई का कारण है मांग का बढ़ना।
पर कभी कभी ऐसा भी होता है जब हम बढ़ती महंगाई और Recession साथ साथ देखते है। उस स्थिति को "Stagflation" कहते है।एक बात ध्यान देने योग्य और है कि Economic growth की घटती दर को Recession या Depression ना समझ ले।
जैसे अगर हमारी अर्थव्यवस्था पहले 10% की रफ्तार से आगे बढ़ रही थी और वो अब हर तिमाही में घटती हुई दिखाई दे रही है जैसे 10% से 8% फिर 6% फिर 4% तो इसे "Slowdown" कहा जाता है। दोनों में अंतर ये है कि स्लाउडाउन में इकॉनमी बढ़ती है पर धीमी रफ्तार से। जबकि Recession में इकॉनमी बढ़ती ही नहीं।
आपको पता तो होगा कि हम इस वक़्त Recession में है।

