अयोध्या : लगभग 500 वर्षों बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को कर दिया था। देश के सभी राम भक्त चाह रहें हैं कि जब मंदिर बने तो उसे देखने वाला बस देखते ही रह जाए इसके लिए मंदिर निर्माण कमेटी विशेष व्यवस्था कर रही है। वहीं राम मंदिर बनने के सालों बाद ज्यों का त्यों बना रहे इसके लिए मंदिर निर्माण में प्रयोग की जाने वाली सामग्री की विशेष जांच की जाएगी।
रामजन्मभूमि महासचिव चंपत राय ने बताया— रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर निर्माण में जिन सामग्रियों का उपयोग किया जाना है, पहले उनकी ताकत की जांच की जानी है। फिर इसके बाद उनकी ताकत अथवा क्षमता को बढ़ाने के लिए उसमें विशेष रसायनों का प्रयोग किया जाना है। इन सभी विषयों पर भी CBRI व IIT चेन्नई के विशेषज्ञ शोध कार्य कर रहे हैं, शोध पूरा होने के बाद ही अगले चरण में निर्माण की प्रक्रिया का कार्य शुरू हो सकेगा। उन्होंने बताया कि निर्माण में कौन सी और कहां कि गिट्टी प्रयोग होगी और कहां से मोरंग आएगी , उसका भी परीक्षण होना है। उन्होंने जानकारी दी कि बुंदेलखंड की गिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसी तरह से बेतवा - केन नदी के मोरंग को भी सबसे अच्छा माना जाता है। फिर भी इनका परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि IIT चेन्नई के विशेषज्ञों ने दस - दस टन गिट्टी व मोरंग की मांग की है जिनका परीक्षण होना है। विशेषज्ञों की मांग के अनुसार यह गिट्टी और मोरंग चेन्नई भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी तरह से सीमेण्ट का भी परीक्षण कर बताया जाएगा कि किस स्टैंडर्ड की सीमेण्ट प्रयोग की जानी चाहिए। विशेषज्ञ सीमेण्ट की क्षमता वृद्धि के लिए रसायनों पर शोध कर रहे है। इसके बाद उनकी रिपोर्ट मिलने पर ही निर्माण कार्य तेजी से किया जा सकेगा।
