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| योगेश मालवीय |
मलखंभ के गढ़ उज्जैन का नाम अब मलखंभ और खेल जगत में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा। उज्जैन के मलखंभ कोच योगेश मालवीय को भारत सरकार की ओर से खेल रत्न अवार्ड द्रोणाचार्य से सम्मानित किया जाएगा। देश में मलखंभ के क्षेत्र में यह पहला द्रोणाचार्य अवार्ड होगा।
द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए भारत सरकार द्वारा उज्जैन से मलकम्भ खिलाड़ी योगेश मालवीय का नाम तय करने के बाद प्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, उज्जैन से सांसद अनिल फिरोजिया और स्पोर्ट एंड युथ वेलफेयर डिपार्टमेंट ने ट्वीट कर योगेश मालवीय को शुभकामनाएं बधाई दी है।
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के मलखंब प्रशिक्षक योगेश मालवीय का नाम इस वर्ष द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए घोषित किया गया है। उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं।
— Yashodhara Raje Scindia (@yashodhararaje) August 21, 2020
इस पारंपरिक खेल के प्रति उनकी लगन, निष्ठा और अनुशासन ने यह मुकाम हासिल करने में सफलता मिली है ।#MPStateAcad pic.twitter.com/2JGM8LkiZZ
कभी धोते थे घाट पर कपड़े
योगेश के पिता धर्मपाल मालवीय महाकाल मंदिर के समीप ही प्रेस और ड्रायक्लीन की दुकान संचालित करते थे। आर्थिक संकट के चलते बचपन से ही योगेश उनकी दुकान संभालने लग गए। धोबी घाट पर जाकर कपड़े धोने और प्रेस करने के साथ ही उन्होंने अपना मलखंभ का अभ्यास भी जारी रखा। शुरुआत में उन्होंने कबड्डी के खेल में अभ्यास किया लेकिन धीरे-धीरे वे मलखंभ और योग के प्रति पूरी तरह समर्पित हो गए। 2006 में महाकाल क्षेत्र में ही पिता के साथ भक्ति भंडार की दुकान खोली। प्रशिक्षण देने के बाद नियमित यहां कंठी-माला बेचने का कार्य भी किया।

